चरवाही

श्रृंखला 4

आत्मा और जीवन

पाठ तीन – आत्मिक साथी

2 तीम- 2:22-जवानी की अभिलाषाओं से भाग और जो लोग शुद्ध हृदय से प्रभु का नाम लेते हैं उनके साथ धार्मिकता, विश्वास, प्रेम और शान्ति का अनुसरण कर।

परमेश्वर युवा लोगों को अपने चलन को

पूरा करने के लिए बुला रहा है

परमेश्वर की पुनःप्राप्ति में युवा लोग होना बहुत अच्छा है। हर युग और पीढ़ी में परमेश्वर अपने चलन को पूरा करने के लिए युवा लोगों के पास आया है। बाइबल और कलीसिया का इतिहास दोनों हमें दिखाता है कि परमेश्वर युवा लोगों का उपयोग करना चाहता है। हम कह सकते हैं कि आदम बहुत जवान था जब परमेश्वर उसके साथ था क्योंकि उसे अभी अभी सृजा गया था। जीवन के मार्ग में मनुष्य की दूसरी पीढ़ी का हाबिल भी शायद जवान था जब उसने प्रभु के प्रति बलिदान चढ़ाया (उत- 4:2, 4)। जब हनोक ने परमेश्वर की उपस्थिति में चलना शुरू किया, वह जवान था। वह पैंसठ वर्ष का था जब उसने परमेश्वर के साथ चलना शुरू किया, लेकिन उसके समय में एक पैंसठ साल का आदमी अभी भी जवान था। वह परमेश्वर के साथ तीन सौ वर्षों तक चला और परमेश्वर ने उसे तीन सौ पैंसठ वर्ष में उठा लिया (5:21-22)।

बाइबल हमें यह भी बताती है कि प्रभु की गवाही को पूरा करने के लिए तीमुथियुस एक जवान के रूप में एक प्रेरित बना (1 थिस- 1:1_ 2:6)। 2 तीमुथियुस 2:22 में पौलुस ने लिखा, ‘‘जवानी की अभिलाषाओं से भाग।’’ यह सूचित करता है कि उस पत्र को प्राप्त करने वाला अभी भी जवान था। मुझे खुशी है कि जब मैं किशोरावस्था में था तब परमेश्वर ने मुझे बुलाया था। जो लोग पचास साल पहले प्रभु की उचित कलीसिया जीवन की पुनःप्राप्ति के प्रारंभिक चरण में थे, वे अपने बीसवें साल में थे। बहुत कम लोग पच्चीस से ऊपर थे। ज्यादातर उच्च विद्यालय या कॉलेज में थे।

अशुद्ध न होने के लिए

हमारे हृदय में तय करना

दानियल को एक जवान आदमी के रूप में कैद में लिया गया था। वह और उसके तीन दोस्त, जो यहूदा की संतान थे, सीखने के लिए, राजा के महल में आने के लिए चुने गए। वहाँ उन्हें तय करना था कि वे मूर्तियों के बलिदान के भोजन को खायें या नहीं। मांस अब सिर्फ भोजन नहीं रहा_ यह अब दुष्टात्माओं से संबंधित था। इसे खाना एक छोटी बात नहीं थी। दानियल और उसके तीन दोस्तों ने अपने हृदय में तय किया के वे अशुद्ध नहीं होंगे, उस अशुद्ध तत्व में कोई भाग नहीं लेंगे (दान- 1:8)।

दानियल और उसके तीन दोस्तों का राजा के भोजन को न खाना परमेश्वर की गवाही होने के लिए, मूर्तियों के ज्वार के खिलाफ विरोध करना था। यह परमेश्वर की नज़रों में और शैतान की आँखों में भी एक बड़ी बात थी। यह एक आत्मिक युद्ध की लड़ाई थी। ऐसी परिस्थिति में, दानियल वह था जिसे परमेश्वर ने पकड़ा था। अपनी जवानी से ही, वह परमेश्वर द्वारा बुलाया गया, पकड़ा गया और पूरी तरह से व्यस्त किया गया था। आखिरकार, यह वही था जिसे बन्धुवाई से वापस लौटाया गया था। बेबीलोन साम्राज्य का फारसी साम्राज्य बन जाने के बाद डैरिइस और साइरस के शासनकाल के दौरान दानियल तब भी जिन्दा था (दान-9:1-2;  1:21)। जब उसने यिर्मयाह के द्वारा दी गई भविष्यवाणी को पढ़ा कि बन्धुवाई सत्तर सालों में पूरी होगी, उसने परमेश्वर के लोगों के लिए प्रार्थना करना शुरू कर दिया (दान- 9:1-19)। उसकी प्रार्थना इस्राएल की संतानों को बन्धुवाई से लौटने की पूर्ति में लायी जो साइरस के शासनकाल के पहले वर्ष में उसके हुक्मनामा से शुरू हुआ था (एज्रा 1:1-3)।

साथियों की जरूरत

आपके पास भागने और पीछा करने का एक जीवन होना चाहिए। हालांकि जब आप भागने और पीछा करने का प्रयास करते हैं तो आप पाएंगे कि खुद से करने में आप सक्षम नहीं हैं। जवानी की अभिलाषाओं से भागने और मसीह का पीछा करने का तरीका 2 तीमुथियुस 2:2 के अंतिम भाग में है। यह आयत कहती है, ‘‘जवानी की अभिलाषाओं से भाग, और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं उनके साथ धर्मिता, और विश्वास, और प्रेम, और मेलमिलाप का पीछा कर।’’ आपको उनके साथ होने की जरूरत हैं ‘‘जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं।’’ अपने आप से आप अपर्याप्त हैं। कुंजी ‘‘उनके साथ’’ होना है। एक नवयुवक होने के नाते आप बहुत मजबूत हो सकते हैं, लेकिन आपकी ताकत कुछ नहीं है। दुश्मन, शैतान, आपसे बहुत ज्यादा ताकतवर है परन्तु परमेश्वर के प्रभुत्व प्रबंध के तहत आपके पास ‘‘वे’’ हैं। आपको ‘‘उनके साथ, जो शृद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं’’ पीछा करना चाहिए।

प्रभु का पीछा करने में

असली साथियों को खोजना

जवान लोगों को दूसरों को साथी के रूप में लेने का निर्णय लेना चाहिए। दानियल के पास उसके तीन दोस्त थे। नए नियम में प्रभु यीशु के तहत कोई भी चेले अकेले नहीं थे। उन्हें दो दो करके भेजा गया था_ उन सब के पास साथी थे। पतरस और आन्द्रियास और याकूब और यूहन्ना सुसमाचारों में जोडें में कहे जाते हैं (मत्ती- 4:18, 21)।

युवा लोगों को कम से कम एक साथी की जरूरत है। प्रभु के सामने आपको विचार करना होगा कि प्रभु का पीछा करने में आपके पास एक असली साथी है या नहीं। यहोशू कह सकता था कि कालेब उसका साथी था और कालेब यह कह सकता था कि यहोशू उसका साथी था। हालांकि, तीन या चार साथी होना बेहतर है। इस खतरनाक समय के कारण, हमें और साथियों की आवश्यकता है। यदि हमारे पास चार साथी हैं जो हमें प्रत्येक दिशा से सहारा देते हैं, तो हम गिर नहीं पाएंगे, चाहे किसी भी प्रकार का तूफान आए। अगर कोई अकेला खड़ा है तो वह शायद दुश्मन द्वारा पकड़ा जाएगा। जूनियर हाई स्कूल से चार या पांच युवाओं का साथियों के रूप में साथ आना सबसे अच्छा है। युवा भाइयों एक दूसरे के साथ साथी बनें और युवा बहनें एक दूसरे के साथ साथी बनें।

हमें साथियों की जरूरत है न केवल इसलिए कि हम अपने आप से खड़े होने में कमजोर हैं बल्कि इसलिए भी कि हम सभी बहुत स्वाभाविक हैं। हमारे स्वभाविक स्वभाव के अनुसार, हमारे लिए साथी होना बहुत कठिन है। हमारा व्यक्तित्व हमारे लिए एक खुशी है। हम हमारे व्यक्तित्व को बहुत आनंद करते हैं। हम भाई या बहन की परवाह नहीं करेंगें क्योंकि वे हमारे जैसे नहीं हैं। हम मांग करते हैं कि दूसरे हमारे जैसे हों। यह शैतान का है कि हम चाहते है कि लोग हमारी तरह हो सकें। अगर हम प्रभु से प्रेम करते हैं तो हम किसी भी भाई या बहन के पास जाने में सक्षम होंगे, यह परवाह न करते हुए कि वे कैसे हैं। वे धीरे या जल्द, सुस्त या तेज हो सकते हैं, आपके जैसे या आपसे सौ प्रतिशत अलग। हमें सभी फर्क को भुला देना चाहिए। हमारे पास साथी होना अवश्य हैं। अगर युवा लोगों को इस तरह से समूहीकृत किया जाएगा तो शैतान शर्मिंदा किया जाएगा। यह एक बड़ी बात है।

ढीले तरीके से साथी मत रखें। एक भाई को साथी के रूप में मत लें क्योंकि आप उसे पसंद करते हैं और कल उसे अस्वीकार कर दें क्योंकि आप उसे पसंद नहीं करते। यदि वह एक भाई है तो आपको उसे लेना चाहिए। यह आपको रोकेगा और आपको तोड़ देगा। आपको कौन तोड़ेगा? पत्नियां अच्छी ‘‘तोड़ने वाली’’ हैं, लेकिन पतियों को पूरी तरह से तोड़ने के लिए मैं पत्नियों पर भरोसा नहीं करता। अच्छे ‘‘तोड़ने वाले’’ वे भाई-बहन हैं जिन के साथ आप खुद को एकत्रित करते हैं।

साथियों के साथ

जवानी की अभिलाषाओं से भागना

और प्रभु का पीछा करना

चार या पांच साथी पाने के लिए युवा लोगों को प्रभु की ओर देखना है। दुनिया के लोग भी कहते हैं कि संघ में शक्ति है। मैं अकेले से बहुत चीजें करने की हिम्मत नहीं करूँगा, लेकिन जब मेरे पास चार साथी होंगे, तो मैं कुछ भी करने की हिम्मत करूँगा। पांच साथियों को हमेशा एक साथ प्रभु का नाम पुकारना चाहिए (2 तीम- 2:22)। उन्हें हमेशा एक साथ, संगति करने, प्रार्थना-अध्ययन करने, प्रार्थना करने और नए लोगों की देखभाल करने के लिए आना चाहिए। एक भाई का नया व्यक्ति दूसरे भाई का नया व्यक्ति होना चाहिए। इस प्रकार, पांच संतो के एक समूह की देखभाल के तहत पंद्रह नए लोग होंगे। ये सभी नए लोग बच जाएंगे। पुराने और नए नियम दोनों में संतों का सिद्धांत यह है कि उन्हें एक साथ समूहित किया जाना चाहिए। कुछ साथियों के साथ युवा लोगों को जवानी की अभिलाषाओं से भागना और प्रभु के पीछा करना चाहिए।

 

BLEST BE THE TIE THAT BINDS

The Church—Her Fellowship 860

1. Blest be the tie that binds
Our hearts in Christian love;
The fellowship our spirit finds
Is like to that above.

2. Before our Father’s throne,
We pour our ardent prayers;
Our fears, our hopes, our aims are one-
Our comforts and our cares.

3. We share our mutual woes;
Our mutual burdens bear;
And often for each other flows
The sympathizing tear.

4. When we asunder part,
It gives us inward pain;
But we shall still be joining in heart,
And hope to meet again.

5. From sorrow, toil, and pain,
And sin we shall be free;
And perfect love and oneness reign
Through all eternity.