चरवाही

श्रृंखला 4

आत्मा और जीवन

पाठ ग्यारह – नया जन्म

यूहन्ना 3:6-7-जो शरीर से जन्मा है वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है वह आत्मा है। आश्चर्य न कर कि मैंने तुझसे कहा ‘अवश्य है कि तू नया जन्म ले।’

1 पत- 1:23-क्योंकि तुमने नाशमान नहीं वरन् अविनाशी बीज से, अर्थात् परमेश्वर के जीवित तथा अटल वचन द्वारा, नया जन्म प्राप्त किया है।

‘‘जो आत्मा से जन्मा है,

वह आत्मा हैं’’

हमारे पश्चाताप और प्रभु में विश्वास करने के बाद, हमारे पापों को क्षमा किया गया था और परमेश्वर के साथ हमारा मेल-मिलाप हुआ। फिर यह परमेश्वर जो हमें प्रेम करते हैं और जो जीवन दायक आत्मा है हमारे अंदर आता है और हमारी आत्मा को नए सिरे से जन्म देता है। यूहन्ना 3 में यहूदियों के एक शासक निकुदेमुस का उल्लेख है। उन्होंने आदर के साथ प्रभु यीशु को इस्राएल के लिए परमेश्वर की ओर से आये एक शिक्षक के रूप में संबोधित किया और इसलिए वह उससे कुछ सलाह लेने आया था। हालांकि, प्रभु यीशु ने उस से कहा, ‘‘यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता’’(आ- 3)। निकुदेमुस को नया जन्म का अर्थ समझ में नहीं आया। उसने सोचा कि नया जन्म लेने के लिए एक मनुष्य को अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्म लेना है। इसलिए उसने यीशु से कहा, ‘‘मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?’’(आ- 4)। हालांकि जिस नये जन्म की बात प्रभु यीशु ने कही थी, वह पानी (यानी मृत्यु) और आत्मा (जो कि, जीवन) से जन्म लेना था (आ- 5)। फिर प्रभु ने कहा, ‘‘जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है’’ (आ- 6)। पहला आत्मा दिव्य आत्मा है और परमेश्वर को संदर्भित करता है। परमेश्वर आत्मा है। जब हम उससे जन्म लेते हैं, हम आत्मा से जन्में हैं और आखिरकार हम आत्मा हैं, यूहन्ना 3:6 में संदर्भित की गयी दूसरी आत्मा। यही नया जन्म पाना है।

परमेश्वर के जीवन के वचन के द्वारा

1 पतरस 1:23 कहता है, ‘‘क्योंकि तुम ने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।’’ यह हमें दिखाता है कि नया जन्म परमेश्वर के जीवन के वचन के द्वारा है। नया जन्म पाने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या ने परमेश्वर के वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। परमेश्वर का वचन एक ‘‘वंशाणु’’ के रूप में हमारे भीतर प्रवेश हुआ और हमारे अंदर कार्य करता हैं। इस तरह से हम नया जन्म पाते हैं।

विश्वासियों के पास

परमेश्वर का

आत्मिक जीवन होने के लिए

यूहन्ना 1:12-13 कहता है, ‘‘परन्तु जितनो ने उसे ग्रहण किया, उसने उस परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।’’ यह भाग हमें बताता है कि नया जन्म पाने का तरीका प्रभु यीशु में विश्वास करके उसे ग्रहण करना है। वह परमेश्वर की ओर से वचन है (1:1) और वह परमेश्वर की ओर से ज्योति भी है (आ- 9)। जब हम उसे ग्रहण करते हैं, हमें परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया जाता है। यह अधिकार परमेश्वर के जीवन के अलावा कुछ और नहीं है। परमेश्वर हमे अधिकार के रूप में अपना जीवन देता है ताकि हम परमेश्वर की संतान बन सकें। इसलिए, हम न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। यह नया जन्म है जो एक महान बात है।

परमेश्वर के संपूर्ण उद्धार का

केंद्र

हम यह कह सकते हैं कि नया जन्म पाना परमेश्वर के संपूर्ण उद्धार का केंद्र है और जैविक पहलू में परमेश्वर के उद्धार की शुरूआत है। यह आत्मा के रूप में स्वयं परमेश्वर है जो हमें जीवित करने के लिए हमारी आत्मा में आता है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर के आत्मा के द्वारा अपनी आत्मा में हम नया जन्म पाते हैं, हमें जीवित किया जाता है। यह नया जन्म है।

 

प्रभु की स्तुति-

उसकी बढ़ोतरी

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1 पिता की गोद में, पूर्व
युग की शुरूआत हुई
तू पिता की महिमा में था
खुदा का एकलौता बेटा
जब पिता ने हमको दिया
व्यक्तित्व में तू समान था
पिता की सारी भरपूरी
आत्मा में घोषणा हुई।

2  उसकी मृत्यु पुनरूत्थान से
बना तू पहिलौठा पुत्र
उसका जीवन प्रदानता से
उसकी प्रतिलिपि बने
हम उसमें नया जन्म पाकर
खुदा के बहुत पुत्र बने
सच में उसके बहुत भाई
हम सब उसके समान हैं।

3 तू था एक गेंहू का दाना
गिरा पृथ्वी पर मरने
उसकी मृत्यु पुनरूत्थान से
उसका जीवन हम में बढ़ता
हम लाये गये स्वभाव में
और बहुत गेहू बने
जैसे रोटी में सब मिलकर
भरपूरी की घोषणा करते।

4 हम सब उसके प्रतिरूप, हैं
उसकी प्रिय देह दुल्हिन
उसका प्रकटन, भरपूरी,
हमेशा बने रहते
हम सब उसके हैं विस्तार
उसका जीवन बढ़ता, फैलाव
उसकी बहुतायत बढ़ोतरी
उसके साथ महिमामय सिर।