चरवाही

श्रृंखला 4

आत्मा और जीवन

पाठ तेरह – नवीनीकरण

रो- 12:2-इस संसार के अनुरूप न बनों_ परन्तु अपने मन के नए हो जाने से तुम परिवर्तित हो जाओ कि परमेश्वर की भली,  ग्रहणयोग्य और सिद्ध इच्छा को तुम अनुभव से मालूम करते रहो।

तीतुस 3:5-तो उसने हमारा उद्धार किया_ यह हमारे द्वारा किए गए धर्म के कामों के आधार पर नहीं, परन्तु उसने अपनी दया के अनुसार अर्थात् पवित्र आत्मा द्वारा नए जन्म और नए बनाए जाने के स्नान से किया।

पवित्रीकरण

नवीनीकरण को लाता है

नये जन्म के द्वारा हमारे पास परमेश्वर का जीवन है, और पवित्रीकरण के द्वारा हमारा स्वभाव बदल जाता है। जब विश्वासियों को स्वभाविक रूप से पवित्र किया जाता है, स्वतः उसके आत्मिक जीवन में नवीनीकृत किया जाता है।

मन का नवीनीकरण

रोमियों 12:2 कहता है, ‘‘इस संसार के सदृश न बनों; परन्तु तुम्हारे मन के नए हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए।’’ हमें इस युग के सदृश नहीं होना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि हमें प्रचलित नहीं होना चाहिए। बल्कि, हमें मन के नवीनीकरण से रूपांतरित होना चाहिए। शास्त्रों के द्वारा सिखाया गया नवीनीकरण मन का नवीनीकरण है; यह मामला पूरी तरह से मन से संबंधित है। मन हमारी मनोवृत्ति, हमारी धारणा, हमारे धार्मिक विचार, लोगों और चीजों के विषय में हमारे दृष्टिकोण आदि हैं। मुख्य रूप से हमें अपने मन के नवीनीकरण की जरूरत है।

पवित्रशास्त्रों की शिक्षा

और पवित्र आत्मा का

प्रकाशन

हमारे मन का नवीनीकरण कैसे होगा जिससे हमारा पूरा अस्तित्व का नवीनीकरण हो? नवीनीकरण का तरीका प्रार्थना करने में और शास्त्र पढ़ने में है, क्योंकि हमारे मन का नवीनीकरण होने का मतलब हमें हमारे मानवीय जीवन की चीजों से संबंधित पुराने विचार से मुक्त होना है और पवित्र शास्त्र की शिक्षा और पवित्र आत्मा के प्रकाशन के द्वारा फिर से नया बनना है। जब आप बाइबल पढ़ते हैं और उस के साथ परिचित होते हैं तो पवित्र आत्मा आपको प्रकाशित करेगा और मार्गदर्शन देगा। जब आप दिन प्रति दिन वचन पढ़ते हैं और प्रार्थना करते हैं पवित्र आत्मा आपको प्रकाशन करने आता है, और मन जो आपके अंदर है वह पुराने से नये में बदल जाता है। आपका दृष्टिकोण अलग होता है और आपका अस्तित्व नवीनिकृत हो जाता है।

अपने आत्मिक जीवन में

विश्वासियों का

उनकेरूपांतरण में

परिणाम होना

इस तरह के मन का नवीनीकरण विश्वासियों के आत्मिक जीवन में रूपांतरण में परिणाम होता है। तीतुस 3:5 नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा का नए बनाने का संकेत करता है। नए जन्म का स्नान हमारे पुराने जीवन को धो देता है; इसके होने पर पवित्र आत्मा का नवीनीकरण हमारे मन को बदलता है। जब हमारा मन नया हो जाता है, हमारा पूरा अस्तित्व रूपांतरित हो जाता है। ये मन के नवीनीकरण से रूपांतरित होना है। नए जन्म का स्नान हमारे पुराने मनुष्य के पुराने स्वभाव की सभी चीजों को शुद्ध करता है, जबकि पवित्र आत्मा का नवीनीकरण हमारे अस्तित्व में नयी चीजें, नए मनुष्य का दिव्य सार प्रदान करता है। इसके द्वारा हम पुरानी स्थिति से, जिसमें हम थे एक पूरी तरह से नई स्थिति में मुड़ते हैं, पुरानी सृष्टि की स्थिति से नई सृष्टि की स्थिति में।

 

पिता की आराधना- उसकी नवीनता

16

1 हे पिता तू सदाबहार
तू सदा नया है
तू सदा जीवित प्रभु है
ओस की ताज़गी जैसा

हे पिता तू न बदलता
पुरातन कभी न होता
तू ताजा है हर युगों से,
तेरी नवीनता खुलती जाती

2 ओ खुदा आपका जीवन ‘‘नया’
बिन तेरे सब दुर्बल
पर तेरे साथ सब है ताजा
कितने साल बीत गए

3 हरेक आशीष दी उसने
नये सिरे से भरता
उसकी वाचा, नव उसका मार्ग
हमेशा समान रहता

4 हम उसकी नई सृष्टि हैं
नई आत्मा, नया हृदय
रोज पुराने स्वभाव से बदलते
नया जीवन प्रदान करता

5 पृथ्वी और स्वर्ग नया होगा
नये नगर में सहभागी हम
नया फल होगा हर महीने
सब नया वहाँ होगा

6 ओ पिता आपका जीवन नया
और सब नया आप में
हम गायेगें नव अनंत गीत
नई स्तुति हम तुझे देते।