चरवाही

श्रृंखला 3

भरोसा और आज्ञाकारिता

पाठ आठ – उसने भूखों को अच्छी वस्तुओं से तृप्त किया

लूका 1:53-उसने भूखों को अच्छी वस्तुओं से तृप्त कर दिया, और घनवानों को खाली हाथ निकाल दिया।

लूका 1:53 कहता है, ‘‘उसने भूखों को अच्छी वस्तुओं से तृप्त कर किया, और घनवानों को खाली हाथ निकाल दिया।’’ यह वचन हमें दिखता है कि परमेश्वर का अनुग्रह सिर्फ एक तरह के व्यक्ति के लिए आरक्षित है-भूखे जन के लिए। यदि कोई व्यक्ति सभा में केवल देखने और सुनने के उदेश्य से आता है, तो वह कुछ भी देख नहीं पाएगा या सुन नहीं पाएगा। यदि एक व्यक्ति सिर्फ बाइबल का ज्ञान चाहता है, तो उसकी वास्तविक आत्मिक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा। केवल वे लोग, जिनके पास जरूरी आंतरिक आवश्यकता है और जो परमेश्वर से मिलने के लिए दृढ़ हैं, उसका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। हमें एहसास करना होगा कि आत्मिक प्रगति हमारी भूख पर आधारित है।

पवित्र आत्मा हमें खाली करता है

यह एक आश्चर्यजनक बात है कि हमारे अनुभव में पवित्र आत्मा हमें खाली कर सकता है। कई वास्तविक मसीही ऐसे अनुभव से गुजरे हैं। जब हम पहली बार एक मसीही बने, हम सब चीजों में खुद को अच्छा और सक्षम मानने लगे। लेकिन कुछ समय बाद हमने देखा कि जिस जीवन को हम जी रहे थे, वह मसीही स्तर से कम था; हमे एहसास हुआ कि हम असफल हुए हैं और आगे बढ़ नहीं सकते हैं। अतः हमने असंतुष्टि को महसूस किया, और प्रार्थना की कि परमेश्वर हमें भरे और आज्ञाकारी बनाए। फिर परमेश्वर ने आदेश दिया कि हम असहनीय और अरुचिकर परिस्थितियों का सामना करें। लेकिन परमेश्वर के अनुग्रह से, हमने अंत में उन पर जय पायी। तब हमारे पास गवाही देने के लिए कुछ था और हम यह कहने के योग्य थे कि हमने जय पायी है। हम यह कहने के योग्य थे कि हमने एक निश्चित बात पर विजय प्राप्त की है और यह कि एक निश्चित समय पर परमेश्वर ने हमें भर दिया था। हमने यह भी सोचा होगा कि हम उस समय से जयवंत हाेंगे। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, कुछ समय बाद, जीत खो गई और असफलता फिर से वापस आ गई। हमने सोचा कि जय पाना बहुत ही आसान है लेकिन ऐसा लग रहा था कि सारी ताकत चली गई, और फिर नई बाधाएं हमारे सामने थी। ऐसा लगता था कि हमारे सामने एक दीवार थी और बाहर जाने के लिए कोई रास्ता नहीं मिल रहा था और इसे पार करने का कोई तरीका नहीं था। परिणामस्वरूप, हम ने कहा कि हमारी पिछली विजय खो गई थी और हम परमेश्वर से नही भरे थे।

जब भी वह

हमें हमारे अंत तक लाता है,

हमारी प्रगति शुरू होती है

हमें यह ध्यान रखना है कि हमारी परिस्थितियों में प्रभु द्वारा आदेश किया गया सब कुछ हम में एक आवश्यकता उत्पन्न करने के इरादे से है और हमें यह महसूस करवाने के लिए है कि हम अपने अतीत सम्बन्धी अनुभव से जय नहीं पा सकते। अतीत सम्बन्धी जीत नहीं बदलती, लेकिन अतीत सम्बन्धी जीत के माध्यम से नई कठिनाइयों पर जय पाने की कोशिश कभी काम नहीं करती है। बहुत से लोग अपनी अतीत सम्बन्धी जीत को देखकर आश्चर्यचकित होते हैं कि वे अब जय क्यों नहीं पा सकते। भाइयों और बहनों, हमें यह एहसास करना चाहिए कि परमेश्वर नहीं चाहता कि हम कल का मन्ना रखें। प्रत्येक नई कठिनाई के साथ एक नई जरूरत आती है, जिसका एहसास हमने पहले कभी नहीं किया। भाइयों और बहनों, हम प्रभु के नए ज्ञान और उसके बारे में एक नई दृष्टि के बिना, आगे नहीं बढ़ सकते। जब भी वह हमें हमारे अंत तक लाता है और जब भी हम खुद को रोते हुए पाते हैं कि, ‘‘मुझसे यह नहीं होता!’’, हमारी प्रगति शुरू हो गई है। तब परमेश्वर आसानी से हमारे अंदर उनके लिए एक इच्छा पैदा करने में सक्षम होता है। क्या यह स्पष्ट नहीं है कि हमारी भूख इस तरह के अनुभव से शुरू होती है?

परमेश्वर चाहता है कि आप एक वास्तविक तरीके से उसेब खोजें। इसलिए वह आपके सामने परीक्षा और कठिनाइयां रखता है। जब ये चीजें आपके सामने आती हैं, तो आपको ईमानदारी से उसे खोजना चाहिए। जब आपको वास्तव में उनकी शक्ति की आवश्यकता होती है, तो आप महसूस करेंगे कि आप उसके बिना कुछ नहीं कर सकते हैं।

लगातार खाली किए जाने की

हमारी जरूरत

ताकि हम भरे रहें

भाइयों और बहनों, जब भी हम खाली हो जाते हैं, प्रभु हमें भर देगा। 2 राजा 4 की कहानी हमें एक महत्वपूर्ण आत्मिक सिद्धांत दिखाती है। स्त्री और उसके बेटों के पास क्या था? उनके पास केवल तेल का बर्तन था। बाद में, उस एक बर्तन के तेल को कई खाली बर्तनों में डाल दिया गया था। शुरुआत में, उसके पास जो थोेड़ा सा तेल था, वह महत्वपूर्ण है। बाइबल में, तेल पवित्र आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। पवित्र आत्मा केवल उन लोगों पर काम करता है जिन में पहले से ही आत्मा निवास करता है।

विधवा की समस्या यह थी कि उसके पास बहुत कम बर्तन थे। एलीशा ने उससे कहा, ‘‘तू बाहर जा कर अपने सब पड़ोसियों से खाली बर्तन मांग ले, और थोड़े बर्तन न लाना। फिर तू अपने बेटों समेत अपने घर में जा, और द्वार बन्द कर के उन सब बर्तनों में तेल उण्डेल देना, और जो भर जाए उन्हें अलग रखना (2 राजा 4:3-4)। स्त्री ने क्या किया? ‘‘तब वह उसके पास से चली गई, और अपने बेटों समेत अपने घर जा कर द्वार बन्द किया; तब वे तो उसके पास बर्तन लाते गए और वह उण्डेलती गई। जब बर्तन भर गए, तब उसने अपने बेटे से कहा, मेरे पास एक और भी ले आ, उसने उस से कहा, और बर्तन तो नहीं रहा। तब तेल थम गया’’ (आ- 5-6)। उसे खाली बर्तन उधार लेना पड़ा-यह पवित्र आत्मा के लिए हमारे अंदर खाली कमरे की जरूरत बताती है। उसे केवल थोड़ा सा ही उधार नहीं लेना था-इसका अर्थ यह है कि जितना ज्यादा है, उतना बेहतर। सिर्फ एक खाली कमरा नहीं होना चाहिए बल्कि और अधिक खाली कमरे होने चाहिए।

एक और बहुत महत्वपूर्ण चीज उस जगह है जहां तेल उण्डेला जाना था। यह घर में और द्वार बन्द करके उण्डेला जाना था। दरवाजा बन्द करने का अर्थ यह है कि उस स्त्री को, उनके बेटों को और तेल को द्वार के अंदर सीमित रखना। यह इंगित करता है कि हमें पवित्र आत्मा के साथ सीधे निपटना है। सब कुछ हमारे और प्रभु के बीच होना चाहिए। कठिनाइयां और जीत सब नीजि हैं।

परमेश्वर प्रतीक्षा कर रहा है कि

हम अपने आप को खाली करें

हमें एक और बहुमूल्य बात पर विचार करना हैः ‘‘उसने (बेटे ने) उस से कहा, और बर्तन तो नहीं रहा। तब तेल थम गया।’’ पवित्र आत्मा हर खाली बर्तन को भर देगा, यहां तक कि आखरी बर्तन भी। अगर वहां और अधिक खाली बर्तन थे तो वहां अधिक तेल भी होता। हमें याद रखना होगा कि तेल के थमने का कारण यह था कि वहां और कोई बर्तन नहीं था। ऐसा नहीं था कि पहले तेल थम गया बल्कि सारे खाली बर्तन पहले खत्म हुए। भाइयों और बहनों, परमेश्वर प्रतीक्षा कर रहा है कि हम अपने आप को खाली करें।

हमें प्रभु से प्रार्थना करने और पूछने की आवश्यकता है कि वह हम में और गहराई से खोदे और हम में और ज्यादा जगह बनाये ताकि पवित्र आत्मा हमें भर सके। पवित्र आत्मा का भरना हमारे खाली होने पर निर्भर करता है। मैं दोहराता हूँ: हमारा खाली होना एक निरंतर स्थिति होनी चाहिए। अगर हम स्वयं को खाली नहीं कर सकते तो परमेश्वर हमें भर नहीं सकता। पवित्र आत्मा हमारे अंदर खाली कमरे के इंतजार में है। जितना अधिक खाली कमरे हम उसे देते हैं उतना अधिक वह हमें भर देगा। यदि खाली कमरा है, तो इसका मतलब यह है कि पवित्र आत्मा के द्वारा और भराव आने वाला है। इसलिए, हमें भराव को खोजने की जरूरत नहीं है_ हमें सिर्फ खुद को खाली कर देना चाहिए। केवल पवित्र आत्मा ही भराव के लिए जिम्मेदार है_ हमारी जिम्मेदारी खुद को खाली करना है। अगर हम खुद को खाली कर सकते हैं तो हम में भराव होगा। हम भराव से सचेत नहीं होंगे लेकिन इस भरने का तथ्य निश्चित रूप से हमारे साथ होगा।

 

गीत # 812

1 मैं आता हूँ, प्रभु
दिल प्यासा तेरे लिए
तुझको मैं खाता, पीता हूँ
तुझे आनन्द करता।

2 तेरा मुख देखने को
मेरा दिल रोता है
तुझको पीना मैं चाहता हूँ
मेरी प्यास बुझाने को।

3 तेरा महिमा मय मुख
देखने को दिल चाहता
यहाँ रहूं और ना चलूं
निरंतर देखता हूँ।

4 ऐसी संगति में
प्रभु अनुग्रह है
मेरा दिल आत्मा भर गया
तुझमें आराम करूँ।

5 मैं यहाँ ठहरता हूँ
तुझे ढूँढ़ता र हूँ
प्रार्थना वचन में सदा
जब तक तू ना बहे।