चरवाही

श्रृंखला 3

भरोसा और आज्ञाकारिता

पाठ तेरह – प्रभु यीशु के गुण पहचानना

2 कुर- 5:14-15-क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश करता है जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि जब एक सबके लिए मरा, तो सब मर गए।

15और वह सब के लिए मरा कि वे जो जीवित हैं आगे को अपने लिए न जीएं परन्तु उसके लिए जीएं, जो उनके लिए मरा और फिर जी उठा।

वह विश्वास

जो हमारे अंदर कार्य करता है

गलातियों 2:20 में पौलुस कहता है कि वह जीवन जो हम अब शरीर में जीते हैं हम विश्वास में जीते हैं, परमेश्वर के पुत्र के विश्वास में। हम दिव्य जीवन दृष्टि या भावना से नहीं जीते, जैसे कि हम शारीरिक और प्राणिक जीवन को जीते हैं। दिव्य जीवन, जो हमारी आत्मा में आत्मिक जीवन है, जीवन देने वाले आत्मा की उपस्थिति से प्रेरित विश्वास के अभ्यास से जीते हैं।

विश्वास के बारे में बात करते हुए, पौलुस परमेश्वर के पुत्र के विश्वासय् का संदर्भ देता है। यहाँ पर छोटे शब्द  “का” क्या अर्थ है? इस शब्द का तात्पर्य यह है कि इस आयत में उल्लिखित विश्वास परमेश्वर के पुत्र का विश्वास है, वह विश्वास जो वह स्वयं रखता है। हालांकि, इस आयत की व्याख्या करने में, हम और अन्य लोगों ने कहा कि इस वाक्यांश का वास्तविक अर्थ परमेश्वर के पुत्र में विश्वास है। फिर भी, यहाँ यूनानी शब्द पूर्वसर्ग “में”का प्रयोग नहीं करता है। मैंने इस विषय को समझने की कोशिश करने में काफी समय व्यतीत किया है। कई प्रमुख अधिकारियों के लेखन से परामर्श करने के बाद, मैं पूरी तरह से आश्वस्त हो गया कि यहां पौलुस पुत्र के विश्वास की बात नहीं, बल्कि पुत्र में विश्वास के बारे में कर रहा है। हालांकि, हमें फिर भी इसकी व्याख्या करने की जरूरत है कि इन आयतों में और 2:16 और 3:22, में भी, पौलुस ने पूर्वसर्ग में का उपयोग क्यों नहीं किया। हम केवल काले और सफेद अक्षरों में पवित्रशास्त्र के अध्ययन के द्वारा इसकी उचित समझ हासिल नहीं कर सकते हैं। हमें अपने अनुभव पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

मसीह का हमारे प्रति प्रकाशित होना

और हमारे अंदर प्रदान किया जाना

पौलुस ने गलातियों की पुस्तक को सत्य और अपने अनुभव दोनों के अनुसार लिखा। हमारे मसीही अुनभव के अनुसार, वास्तविक जीवित विश्वास जो हमारे अंदर कार्य करता है केवल मसीह में ही नहीं है, लेकिन मसीह का भी है। इसलिए, यहां पर वास्तव में पौलुस का अर्थ मसीह में और मसीह का विश्वास है। पौलुस का विचार यह है कि विश्वास मसीह में और मसीह का दोनों है।

हमनें इस बात पर ध्यान दिया है कि विश्वास हमारे इस बात की कद्र करना है कि प्रभु क्या है और उसने हमारे लिए क्या किया है। हमने इस बात पर भी ध्यान दिया है कि वास्तविक विश्वास स्वयं मसीह है जिसे हमे उस में विश्वास करने के योग्य बनाने के लिए हमारे अंदर प्रदान किया गया है। प्रभु के हमारे अंदर प्रदान किये जाने के बाद, वह स्वाभाविक रूप से हमारा विश्वास बनता है। एक तरफ, यह विश्वास मसीह का है; दूसरी तरफ, यह मसीह में है। हालांकि, केवल यह कहना बहुत आसान है कि यह विश्वास मसीह है। हमें यह कहने की आवश्यकता है कि यह मसीह का हमारे प्रति प्रकाशित होना है और हमारे अंदर प्रदान किया जाना है। विश्वास न केवल उन मसीह से संबंधित है जो हमारे अंदर प्रदान किया गया था बल्कि उन मसीह से भी जो हमारे अंदर अपने आप को प्रदान कर रहा है। जैसे मसीह हमारे अंदर कार्य करता है, वह हमारा विश्वास बनता है। यह विश्वास उसका है और उसमें भी है।

मसीह के गुण पहचानने के माध्यम से

विश्वास का आना

वचन के अंत में पौलुस के शब्दों से हम सबूत पाते हैं किं गलातियों 2:20 में विश्वास, मसीह का विश्वास और मसीह में विश्वास दोनों है। उसने इस आयत का समापन परमेश्वर के पुत्र का संदर्भ उस जन के रूप में दिया फ्जिसने मुझसे प्रेम किया और मेरे लिए अपने आप को दे दिया।’’ इन शब्दों को लिखने में, पौलुस प्रभु यीशु के लिए कद्र से भरा हुआ था। अन्यथा, इस प्रकार की लम्बी आयत के अंत में उसे मसीह के उससे प्रेम करने और उसके लिए अपने आप को देने के बारे में बोलने की जरूरत नहीं थी। वह परमेश्वर के पुत्र के विश्वास की अभिव्यक्ति के साथ खत्म कर सकता था। लेकिन उसके अब के जीने के बारे में जैसे कि वह बात कर रहा था उसका हृृदय कृृतज्ञता और कद्र से भरा हुआ था। विश्वास प्रभु यीशु के इस तरह के कद्र से आता है। मसीह में विश्वास और मसीह का विश्वास मसीह की कद्र करने से निकलता है।

विश्वास एक जैविक संयोग

उत्पन्न करता है

जिसमें हम और मसीह

वास्तव में एक है

2 कुरिन्थयों 5:14 और 15 में पौलुस कहता है, क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश करता है क्योंकि इस प्रकार हमारा न्याय हुआ है कि जब एक सबके लिए मरा, तो सब मर गएः और वह सब के लिए मरा कि वे जो जीवित हैं उन्हें आगे को अपने लिए नहीं जीना चाहिए, परंतु उसके लिए जीएं जो उनके लिए मरा और फिर जी उठा। जब हम इन आयातों पर ध्यान देते हैं, हम देख सकते हैं कि पौलुस का विश्वास मसीह के विवश करने वाले प्रेम के लिए एक कद्र से आया। जितना ज्यादा हम मसीह के विवश करने वाले प्रेम की कद्र करते हैं, उतना ज्यादा विश्वास हमारे पास होगा। यह विश्वास हमारी अपनी क्षमता या कार्य से उत्पन्न नहीं होता है। इसके बजाय, यह हमारे अंदर उन्हीं मसीह के कार्य करने के द्वारा उत्पन्न होता है जिनकी हम कद्र करते हैं। प्रभु यीशु के लिए हमारे कद्र करने में, हम कहेंगे, प्रभु यीशु, मैं आपसे प्रेम करता हूँ और मैं आपको बहुमूल्य समझता हूँ। जब हम प्रभु से ऐसे शब्द बोलते हैं, वह हमारे अंदर कार्य करता है और हमारा विश्वास बनता है। यह विश्वास एक जैविक संयोग बनाता है जिसमें हम और मसीह वास्तव में एक हैं।

चीन में

बॉक्सर विद्रोह के समय की

एक सच्ची कहानी

मैं आपको एक सच्ची कहानी बताना चाहूगा जो इस बात की पुष्टि करती है कि वह विश्वास जो हमारे अंदर कार्य करता है प्रभु यीशु की हमारी कद्र करने से आता है। चीन में बॉक्सर विद्रोह के समय, सैकड़ों मसीही शहीद हुए थे। एक दिन चीन की पुरानी राजधानी पेकिंग में, बॉक्सर सड़क पर परेड कर रहे थे। बोगी के पीछे एक मसीही महिला बैठी हुई थी जिसे मार डालने के लिए ले जाया जा रहा था। वह हाथों में तलवारों के साथ जल्लादों से घिरी हुई थी। वातावरण भयानक था, बॉक्सर के चिल्लाने से भरा था। फिर भी, उसका चेहरा चमक रहा था, जैसे कि वह प्रभु की स्तुति गा रही हो। दंगों के कारण दुकानें बंद थीं। हालांकि, एक जवान दुकान के आगे की एक दरार से इस दृश्य को देख रहा था। युवा महिला के चमकते चेहरे, खुशी और प्रशंसा के गीतों की गहराई से प्रभावित होकर, उसने उसी क्षण फैसला किया कि वह मसीही विश्वास की सच्चाई का पता लगाएगा। बाद में, उसने सत्य को सीखा और वह मसीह में एक विश्वासी बना। आखिरकार, उसने अपना व्यवसाय छोड़ दिया और एक प्रचारक बन गया। एक दिन, जब वह मेरे गांव आया, उसने मुझे यह कहानी बतायी कि वह कैसे एक मसीही बना।

यहां पर बिन्दु यह है कि यह युवा महिला इस प्रकार कि भयानक परिस्थिति के मध्य में भी स्तुति से भरी रह सकी क्योंकि विश्वास उसके अंदर कार्य कर रहा था। वह प्रभु यीशु के लिए कद्र से भरी हुई थी। क्योंकि वह उसको बहुत प्यार करती थी, वह स्वाभाविक रूप से उसके अंदर विश्वास बन गया। इस विश्वास ने एक जैविक संयोग को उत्पन्न किया जिसमें वह प्रभु के साथ जुड़ी थी। यह जैविक संयोग परमेश्वर की नये नियम की व्यवस्था का एक बुनियादी और महत्वपूर्ण पहलू है।

 

गीत # 171

1 प्रभु यीशु लगे मन को प्यारा
सोचूं जो मैं तुझे
प्रिय उपस्थिति को मैं तरसुं
कि जल्द उठाया जाऊं

तू मेंहदी के फूलों सा है सुन्दर
दाख की बारी में खिलता
तेरी खूबसुरती अतुलनीय
तारीफ व प्रेम करे मन

2 कोई संगीत नहीं जो करे
अनुग्रह की पूर्ण स्तुति
न मन कोई जो आनंद करे
तेरे प्रेम को हर पहलू में

3 मन को जो आनंदित करे वो प्रेम न ही अनुग्रह
पर तेरा ही प्रेमपूर्ण जी मधुर से भी मीठा
स्वर्ग, धरा पर सिवा तेरे चाहे न कुछ मेरा मन
संतुष्ट करता है सदा

4 तू सुन्दर से परम सुन्दर
मधुर से भी मीठा
स्वर्ग, धारा पर सिवा तेरे
चाहे न कुछ मेरा मन।