चरवाही

श्रृंखला 3

भरोसा और आज्ञाकारिता

पाठ पंद्रह – परमेश्वर की सुरक्षित रखने वाली शक्ति

यहो- 14:11,14-जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने, या भीतर बाहर आने जाने के लिए जितनी उस समय मुझ में सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है।

14 इस कारण हेब्रोन कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब का भाग आज तक बना है, क्योंकि वह इस्राएल  के परमेश्वर यहोवा का पूरी रीति से अनुगामी था।

‘‘जैसे मेरी सामर्थ्य तब थी,

वैसे ही मेरी समार्थ्य अब है’’

यह दुःखद तथ्य है कि कुछ मसीही परमेश्वर की बचाने वाली शक्ति में विश्वास करते हैं, लेकिन वे परमेश्वर की सुरक्षित रखने वाली शक्ति में विश्वास नहीं करते। उन्होंने परमेश्वर के बचाने वाले अनुग्रह को प्राप्त किया है लेकिन फिर भी उसके सुरक्षित रखने वाले अनुग्रह को प्राप्त नहीं किया है। वे इस बात को एहसास नहीं करते कि जो अनुग्रह का देने वाला है वह हमें अपने अनुग्रह में सुरक्षित रखने वाला भी है। आइए पवित्रशास्त्र से हम देखते हैं कि कैसे हम जो परमेश्वर द्वारा बचाये गये हैं उसके द्वारा सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

यहोशू 14:11 कहता है, जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है_ युद्ध करने, या भीतर बाहर आने जाने के लिए जितनी उस समय मुझ में सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है। यह कालेब का शब्द है। बाहर जाना और अंदर आना दिन प्रतिदिन के जीवन से संबधित है; युद्ध के लिए असाधारण परिस्थितियों के तहत जीवन को सूचित करता है। कालेब की शक्ति दैनिक जीवन के सामान्य मांगों के साथ-साथ विशेष तनाव की स्थिति के तहत जीवन की मांगों से सामना करने में उतनी ही थी जितनी मूसा से बात करने के समय थी। यद्यपि अंतराल के चालीस साल बीत चुके थे, वह उतना ही मजबूत था, जितना वह पहले के दिनों में था। यहां पर हम परमेश्वर की सुरक्षित रखने वाली शक्ति को देख सकते हैं। कालेब की शक्ति उन दिनों में भी वैसे ही थी जैसे चालीस साल पहले थी। इस समय पर वह उतना ही मजबूत था जितना वह तब था। वह पिचासी में भी चालीस से कम बलवान नहीं था। इसके लिए केवल एक स्पष्टीकरण हैः वह परमेश्वर द्वारा सुरक्षित रखा गया था। हम अपने आप को परमेश्वर के अनुग्रह में रखने में पूरी तरह से असक्षम हैं। कोई आश्वासन नहीं है कि उद्धार पाने के पांच साल बाद भी हम विश्वास के उसी माप पर पाए जाएंगे जितना हम अपने पहले मसीही जीवन में थे। हम अपने प्रयास से परमेश्वर के अनुग्रह में नहीं बने रह सकते_ केवल वही हमें अपने अनुग्रह में बनाये रख सकता है।

विश्वास करना कि

परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं विश्वासयोग्य हैं

कालेब के लिए परमेश्वर की सुरक्षित रखने वाली शक्ति को अनुभव करने की स्थिति क्या थी? आइए एक मिनट के लिए इस मामले पर ध्यान दें। यहोशू 14:14 कहता है, वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के पूरी तरह से अनुगामी था। और वह पूरी तरह से परमेश्वर का अनुगामी कैसे था? गिनती 13 और 14 में हमें बताया गया है। गिनती 13:30 कहता है, कालेब ने मूसा के सामने प्रजा के लोगों को चुप कराने के विचार से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें, क्योंकि निःसंदेह हम में ऐसा करने की शक्ति है। हम में ऐसा करने की शक्ति है। एक व्यक्ति जो पूरी तरह से प्रभु का अनुगामी है वह वो है जो विश्वास करता है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं विश्वासयोग्य हैं, कि वह अपने लोगों के साथ हैं, और वे जय पाने में सक्षम हैं। भाईयों और बहनों, क्या आप इस पर विश्वास करते हैं? बहुत से लोग इस पर विश्वास करते हैं, लेकिन उनका विश्वास अस्थिर विश्वास है। वे बहुत ही डरपोक हैं। वे स्तुति के भजन गाते हैं, लेकिन यद्यपि शब्द ठीक है, धुन के साथ कुछ गड़बड़ है। कालेब के मामले में ऐसा नहीं था_ उसने सही धुन में सही शब्द गाया। उसने कहा, ‘‘हम अभी चढ़े।’’ एक व्यक्ति जो पूरी तरह से प्रभु का पीछा करता है और उसे विश्वासयोग्य मानता है वो वह व्यक्ति है जो परमेश्वर की इच्छा को पूरा करता है और इसे तुरंत करता है।

स्वयं को देखना

असफलता में परिणाम होगा

दस भेदियों के बारे में क्या? उन्होंने भूमि के निवासियों पर निगाह डाली और देखा कि वे ‘‘महान आकार के पुरुष’’ थे और उनके नगर ‘‘दृढ़ और बहुत बड़े थे।’’ उन्होंने स्वयं को भी देखा और अपने खुद की दृष्टि में वे ‘‘टिड्डी की तरह’’ थे। उनकी आँखें उनके सामने की कठिनाइयों पर स्थिर थीं—असफलता के कई अनुभव इसलिए आते हैं क्योंकि हम पहले से ही उनकी आशा करते हैं। हम सोच सकते हैं कि हम अन्य समस्याओं से निपट सकते हैं लेकिन एक विशिष्ट समस्या से निपटने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ऐसे सोचने में, हमने हार के लिए रास्ता तैयार करके रखा है जैसे ही समस्या हमारे पास आती है। जैसे ही हमारी आँखे खुद पर लगायी जाती हैं, हम निश्चित रूप से असफल होंगे। अगर परमेश्वर हमें बचाएंगे, तो उन्हें पहले हमारी आँखों को खुद को देखने से बचाना होगा ताकि हम उनके वादों को देख सकें। हम केवल तब तक हिम्मत रखते हैं जब तक कि हम परमेश्वर के वादे को ध्यान में रखते हैं। एक बार जब हम उसके वादे देखते हैं तो हम देखेंगे कि हम जय पा सकते हैं।

परमेश्वर के बहुत ज्यादा लोंगों के पास उस विश्वास की कमी है जो कालेब की विशेषता थी; वे अपनी बीमारियों की गम्भीरता पर, घाव के निशान की तीव्रता पर और अपनी कठिनाईयों के अजय स्वभाव पर ध्यान देते हैं। लेकिन कितने हैं जिनकी आँखें परमेश्वर के वादे पर लगी हैं? वे जो ‘‘अनाक के वंश’’ से डरते नहीं है ‘‘वे उन पर जय पाने में योग्य हैं।’’

हमें अपनी कठिनाईयों और

अपने प्रलोभनों को

खाना होगा

कालेब के संबंध में एक और महत्वपूर्ण बात है। गिनती 14:9 में उसने इस्राएल की संतानों की सारी प्रजा को यह कहा था, ‘‘तुम यहोवा के विरुद्ध विद्रोह न करो_ और न तो उस देश के लोगों से डरो, क्योंकि वे हमारी रोटी ठहरेंगे’’ उसने इस्राएलियों से कहा था कि वे तुरन्त जा सकते हैं, वे जयवंत हो सकते हैं और उन्हें उनसे डरना नहीं होगा क्योंकि वे ‘‘हमारी रोटी होंगे।’’ रोटी खाने के लिए कुछ है। रोटी ऐसी चीज है जो बढ़ती ताकत लाती है, और जो इसे खाता है, उसे पहले से और मजबूत बनाती है। यह मानना है कि देश के निवासी ‘‘महान आकार के पुरुष’’ थे लेकिन कालेब की आँखों में वे, परमेश्वर के लोगों के लिए, भोजन थे। उसने न केवल परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं का आदर किया, उसने सभी कठिनाइयों को तिरस्कृत किया। हर कोई जिसके पास वास्तविक विश्वास है परमेश्वर का सम्मान करता है और सभी कठिनाइयों को बहुत कम मान्यता देता है। लेकिन यह घमंड के लिए कोई जगह नहीं छोड़ता, क्योंकि केवल वे लोग जो परमेश्वर के सामने खुद को विनम्र करते हैं, उसकी जीत पर खड़े होने में सक्षम होंगे।

यह आत्मिक क्षेत्र में भी सच है। कुछ भाइयों और बहनों ने कुछ कठिनाइयों का सामना किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि उनके जीवन में कई कमजोरियां हैं। वे प्रभु के सामने कमजोर हैं क्योंकि उन्होंने पर्याप्त अनाकवंशी का भक्षण नहीं किया है। हालांकि, ऐसे लोग हैं जिन्होंने कठिनाई के बाद कठिनाई और प्रलोभन के बाद प्रलोभन का सामना किया है और जय भी पायी है_ वे उत्साह से भरे हुए हैं क्योंकि उन्होंने अनाकवंशी को अच्छी तरह से खाया था। हर कठिनाई और हर प्रलोभन जो शैतान हमारे रास्ते में डालता है, हमारे लिए भोजन है। यह आत्मिक प्रगति के लिए परमेश्वर का नियुक्त माध्यम है। किसी भी मुसीबत की दृृष्टि उन लोगों के दिल में आंतक पैदा करती है जिनके पास विश्वास नहीं होता है, परन्तु जो लोग उन पर भरोसा करते है कहते है, ‘‘मेरा भोजन आ रहा है!’’ प्रभु की स्तुति और धन्यवाद कि हमारी सभी परीक्षा, बिना किसी आपत्ति के, हमारे लिए रोटी है। हर परीक्षा को खाने के बाद, यह हमें प्रगति में लाती है। जैसे कि हम एक के बाद एक परीक्षा स्वीकार करते हैं, हम अधिक से अधिक समृद्ध रूप से पोषित होते हैं।

विश्वास के माध्यम से

परमेश्वर के सामर्थ्य के द्वारा रक्षा किया जाना

1 पतरस 1:5 ‘‘विश्वास से परमेश्वर के सामर्थ्य के द्वारा रक्षा’’ के बारे में बात करता है। परमेश्वर उनकी रक्षा करता है जो उस में विश्वास रखते हैं। हमें प्रलोभन के साथ कुश्ती करके उस पर विजय पाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए_ परमेश्वर की सुरक्षित रखने वाली शक्ति हमें पार करवाती है और हमें उसकी क्षमता में विश्वास करना चाहिए जो हमें पाप को रास्ता देने से बचाता है। अगर हम निस्संदेह उस पर भरोसा करते हैं, भले ही हमें अचानक से प्रलोभन से झटका मिल जाए, तो एक आश्चर्यजनक चीज होगी। एक तरह से हम इस बात का जवाब नहीं दे सकते हैं, कुछ तो है जो दुष्ट व्यक्ति के सभी अग्नि-बाणों को रोकता है। यह विश्वास की ढाल है। यह हमारे और शैतान के बीच में आ जाएगी, ताकि उसके अग्नि-बाण हमारे पास नहीं पहुंच सकें। हमें चोट पहुंचाने के बजाय वे विश्वास के ढाल पर मारकर खुद शैतान पर पलठवार करेगा।

प्रभु अपने वापस आने के

दिन तक हमें सुरक्षित रखेगा

यदि आपका जीवन वास्तव में उसके हाथों में है, तो यहूदा 24 की प्रतिज्ञा-‘‘अब जो ठोकर खाने से तुम्हारी रक्षा कर सकता है, और अपनी महिमा की उपस्थिति में तुम्हें निर्दोष और आनंन्दित करके खड़ा कर सकता है’’ तुम में पूरी हो जाएगी। ठोकर लगना फिसलना है और किसी भी चीज से टकराना है जब हम रास्ते में बाधाओं से अपरिचित हैं। परमेश्वर की स्तुति हो, वह हमें न केवल गिरने से बचाएगा बल्कि थोड़ा सी फिसलन से भी बचाएगा। प्रभु का धन्यवाद और स्तुति हो, उसका संरक्षण करने वाला अनुग्रह हमारी चेतना के क्षेत्र से परे है। भाइयों और बहनों, अगर हम खुल कर अपने आप को उसकी देखभाल में देते हैं तो हम आश्चर्य करेंगे कि हम किस तरह से सुरक्षित रखे जाते हैं। जब प्रलोभन अचानक आक्रमण करता है और प्रेम की आवश्यकता होती है, तो हम प्रेम को भीतर से स्वाभाविक रूप में उमड़ते हुए पायेंगे। जब अचानक प्रलोभन धैर्य की मांग करता है, यह एक पल के विचार के बिना, हमारी धैर्य, मांग को पूरी करने के लिए उत्पन्न हो जाएगा। परमेश्वर के स्तुति हो, जैसे ही आदम से प्राप्त जीवन स्वभाविक रूप से स्वयं को अभिव्यक्त करता है, वैसे ही मसीह से प्राप्त जीवन भी अभिव्यक्त हो सकता है। बुरी मनोवृत्ति हमने आदम से प्राप्त की है और हम बिना किसी इच्छा के, थोड़े भी प्रयास किए बिना, गुस्सा हो सकते हैं। हमने आदम से घमंड प्राप्त किया है और हम जानबूझकर किसी भी निर्णय के बिना अभिमानी बन जाते हैं। उसी तरह, जिन्होंने मसीह के जीवन को प्राप्त किया है और स्वयं को उसकी हिफ़ाज़त में सौंप दिया है, वे अपने दिमाग को बिना मजबूत बनाए, नम्र हो सकते हैं और विनम्र होने की कोई कोशिश के बिना, विनम्र होते हैं। अभिव्यक्ति की एक ही सहजता जो आदम से प्राप्त जीवन की विशेषता है, वही मसीह से प्राप्त जीवन की विशेषता है। प्रभु यीशु ने जो हमें दिया है, उसे पूरा करने के लिए हमें किसी भी प्रयास की आवश्यकता नहीं है। अगर हम उसके वादे पर भरोसा रखते हैं और पूरी तरह से अपने आप को समर्पित करते हैं तो हम इस दिन से लेकर उसकी वापसी के दिन तक सुरक्षित रहेंगे और हम दोषहीन रखे जाएंगे। परमेश्वर का शुक्रिया हो कि हमारे पास एक उद्धार है जो हमारे भरोसे के योग्य है और जो हर परीक्षा का सामना करेगा।

I KNOW NOT WHY GOD’S WONDROUS GRACE

Assurance and Joy of Salvation— Secured by Divine Provisions – 333

  • 1. I know not why God’s wondrous grace
    To me He hath made known,
    Nor why, unworthy, Christ in love
    Redeemed me for His own.

But “I know Whom I have believed
And am persuaded that He is able
To keep that which I’ve committed
Unto Him against that day.”

  • 2. I know not how this saving faith
    To me He did impart,
    Nor how believing in His word
    Wrought peace within my heart.
  • 3. I know not how the Spirit moves,
    Convincing men of sin,
    Revealing Jesus through the Word,
    Creating faith in Him.
  • 4. I know not what of good or ill
    May be reserved for me,
    Of weary ways or golden days,
    Before His face I see.
  • 5. I know not when my Lord may come,
    At night or noon-day fair,
    Nor if I’ll walk the vale with Him,
    Or “meet Him in the air.”