चरवाही

श्रृंखला 1

उच्च सुसमाचार

पाठ छह – मसीह परमेश्वर है

इब्र. 1:8-परंतु पुत्र के विषय में वह कहता है, हे परमेश्वर, तेरा सिहांसन युगानुयुग का है, तेरे राज्य का राजदण्ड धार्मिकता का राजदण्ड है।

बाइबल और परमेश्वर को समझने की चाबी यीशु मसीह का व्यक्ति है—कई इतिहासकारों ने उसे एक महान नेता माना है, और कई सामाजिक सुधारकों ने उसे मानव जाति के लिए एक महान शिक्षक माना है। नेपोलियन ने खुद को सिकंदर महान, जूलियस सीजर, और शारलेमेन के समान समझा, लेकिन स्वीकार किया कि यीशु उन सभी के ऊपर थे और अलग वर्ग के थे। प्रारंभिक मार्क्सवादियों ने इनकार किया कि वह परमेश्वर है, और एंगेल्स ने यहां तक अस्वीकार किया कि यीशु कभी अस्तित्व में था। लेकिन बाद में मार्क्सवादियों ने स्वीकार किया कि यूरोपीय इतिहास और संस्कृति से यीशु को मिटाने का प्रयास निरर्थक और हास्यास्पद है, और यह कि यीशु फ्सबसे पवित्र मानवीय मूल्यों का एक उदाहरण है।

मसीह की खुद की घोषणा

निर्गमन की पुस्तक हमें बताती है कि परमेश्वर का नाम है, मैं हूँ (3:14)। जब यीशु ने कहा, इब्राहीम के अस्तित्व में आने से पहले मैं हूँ, यहूदियों ने उस पर फेंकने के लिए पत्थर उठाये क्योंकि उन्हें पता था कि वह यह कह रहा था कि वह परमेश्वर है। यीशु महान मैं हूँ के रूप में अनन्त, सदा-अस्तित्व परमेश्वर है।

मसीह के चमत्कार साबित करते हैं कि

वह परमेश्वर है

मसीह के देवत्व का एक और सबूत वे चमत्कार हैं जो उसने पृथ्वी पर किये थे। अपने समय के निपुण यहूदी शिक्षकों में से निकुदेमुस ने यह स्वीकार किया कि कोई भी वह चमत्कार नहीं कर सकता है, जो मसीह ने किये, जब तक कि परमेश्वर उसके साथ न हो (यूहन्ना 3:2)। अपनी साढे़ तीन साल की सेवकाई के दौरान उसने कुष्ठ रोगियों को चंगा किया (लूका- 5:12-13), लंगड़े को (मत्ती- 11:5), गूंगे को (मरकुस 7:37), और अंधें को ठीक किया (मत्ती- 8:27-30) और यहां तक कि मुर्दे को जीवित किया (यूहन्ना 11:43-44)। उसने दुष्ट आत्माओं को निकाला (मत्ती- 8:28-32), तूफान को शांत किया (मत्ती- 8:23-27)। उसने पांच रोटियाँ और दो मछलियों से पांच हजार को खिलाया (मत्ती- 14:25)। उसने पानी को दाखरस में परिवर्तित किया (यूहन्ना 2:1-11) और समुद्र पर चला (मत्ती- 14:25)। उसके पास प्रकृति के ऊपर शक्ति और दुष्ट आत्माओं पर अधिकार था। उसने परमेश्वर के राज्य को लाने के लिए इस शक्ति और अधिकार का अभ्यास किया, और यहां तक कि यह शक्ति और अधिकार अपने चेलों को भी दिये। पुराने नियम में कुछ भविष्यवक्ता चमत्कार करने में सक्षम थे, लेकिन कोई भी ऐसा चमत्कार करने में सक्षम नहीं था जैसे यीशु ने किये। यीशु मरे हुओं को जीवन में उठाने में सक्षम थे क्योंकि वह परमेश्वर है और वह जीवन की शक्ति रखता है। उसने घोषणा की थी वह पुनरूत्थान और जीवन है (यूहन्ना 11:25)। उसने प्रकृति और शैतान के ऊपर प्रभु होकर स्वयं को साबित किया। यूहन्ना का सुसमाचार कहता है कि ये चमत्कार उसकी महिमा को प्रकट करते हैं (यूहन्ना 2:11) और साबित करते हैं कि वह परमेश्वर का पुत्र है (यूहन्ना 20:30-31)।

मसीह के वचन गवाही देते हैं कि

वह परमेश्वर है

मसीह ने अधिकार और जीवन के साथ बातें की (मत्ती- 7:28-29; यूहन्ना 6:63)। कई महान नेताओं ने भावी पीढ़ी के लिए बुद्धि के शब्दों को छोड़ा है, लेकिन इतिहास में किसी ने कभी भी कई जिंदगियों पर प्रभाव नहीं डाला है जैसा कि मसीह ने अपने वचनों से किया।

गाँधी यह नहीं कह सके कि वह जगत की ज्योति थे, ना ही अरस्तू कह सका कि वह मार्ग और वास्तविकता और जीवन था। दुनिया के सबसे बड़े दार्शनिक ज्यादा से ज्यादा यह कह सकते हैं कि वे दूसरों को मार्ग बताते हैं, वे कभी नहीं कह सकते कि वे मार्ग हैं। लेकिन मसीह ने कहा कि वह मार्ग और वास्तविकता और जीवन है। एक फ्रांसीसी दार्शनिक ने एक बार कहा था कि अगर सुसमाचार का अभिलेख एक धोखा धड़ी है, तो जिसने अभिलेख की धोखा धड़ी की, वह स्वयं मसीह बनने के योग्य होगा।

मसीह की मृत्यु साबित करती है कि

वह परमेश्वर है

मसीह ने अपनी मृत्यु से पहले इसके विषय में अपने चेलों को बताया था (मत्ती- 16:21) उसकी मृत्यु मसीहा के बारे में सैकड़ों साल पहले की भविष्यवाणी की सटीक पूर्ति थी। पुराने नियम में, भजन संहिता 22:15-18 मसीह की मृत्यु के दर्शन का वर्णन करते हैं: मेरा बल टूट गया, मैं ठीकरा हो गया, और मेरी जीभ मेरे जबड़े में फंस गई है, तुने मुझे मृत्यु की धूल में डाल दिया है। कुत्ते मुझे घेरे, दुर्जनों की एक मंडली मुझे घेर लेती है, वे मेरे हाथों और पैरों को छेदते हैं। मैं अपनी सारी हड्डियां गिनता हूँ,  वे देखो, वे मुझे घूरते हैं वे मेरे कपसडों को अपने आप में बाटते हैं, और मेरे कपड़ों के लिए बहुत सी चिट्ठी डालते हैं। यह मसीह के मरने के तरीके का स्पष्ट विवरण है। यदि हम सुसमाचार के अभिलेखों को पढ़ते हैं, तो हम पाते हैं कि यह वही तरीका था जैसे मसीह मरा। जब मसीह क्रूस पर लटका था, उसके हाथ और पैरों को वास्तव में बेधा गया था। रक्त और जल की निकासी के कारण निर्जलीकरण निश्चित रूप से उसकी जीभ जबड़ों में चिपकने और उसकी हड्डियों के दिखाई देने का कारण बना। मत्ती- 27:35 कहता है कि जब सैनिकों ने मसीह को क्रूस पर चढ़ाया था, तो पुराने नियम की भविष्यवाणी के शब्दों की ठीक ठीक पूर्ति हुई चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बाँट लिये।

मसीह के मरने के समय और तरीके को पुराने नियम के प्रतीकों में सैकड़ों वर्ष पहले दिखाया गया था (निर्ग.12:3, 5-6) —जब मसीह मरा उसने कहा, पूरा हुआ (यूहन्ना 19:30) । मसीह की मृत्यु मसीह का अन्त नहीं थी, बल्कि, यह उसके कार्य के लिए चोटी का पत्थर था—-मसीह की मृत्यु ने अलौकिक घटनाओं को किया, जो उसकी मृत्यु के अलौकिक स्वभाव को प्रतिबिंबित करती है (मत्ती- 27:45, 51-53)—बाइबल कहती है कि मसीह सभी पापियों के बदले में मरा (1 पत. 3:18)—मसीह की छुटकारे की मृत्यु की अनन्त प्रभावकारिता सबूत है कि मसीह परमेश्वर है (इब्र- 9:12-14)।

मसीह का पुनरूत्थान साबित करता है कि

वह परमेश्वर है

मसीह कब्र में सत्तर घंटे से भी कम समय के लिए था। तीसरे दिन मसीह कब्र से जीवित हो उठा (मत्ती- 28:1-6)। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है, जिसे कोई इतिहासकार नहीं बदल सकता है। वह एक शरीर के साथ पुनरिूत्थत हुआ और चालीस दिन तक कई बार अपने चेलों को दिखाई दिया (1 कुर- 15:4-7_ प्रे. 1:3)। कई आधुनिक आलोचकों ने पुनरूत्थान को खारिज कर दिया है एक मिथक या एक कहानी के रूप में कि शुरूआती चेलों ने बना दिया। लेकिन यह तथ्य कि इतने सारे गवाहों ने मसीह को उनके जी उठने के बाद देखा, और यह तथ्य कि पुनरूत्थित मसीह के साथ उनका सामना जीवन में गहरा बदलाव लाया, यह मजबूत प्रमाण है कि पुनरूत्थान एक झूठी बात नहीं है। मसीह के पुनरूत्थान से पहले चेले भयभीत और निराश थे, पतरस ने भी तीन बार प्रभु का इंकार किया (लूका 22:54-62)। उसके पुनरूत्थान के बाद लोगों का वही समूह साहसी और उत्सुक बन गया। पतरस पिन्तेकुस्त के दिन तीन हजार से ज्यादा लोगों को प्रचार करने के लिए खड़े होने वाला पहला व्यक्ति था (प्रे. 2:14)। कोई भी झूठी बात ऐसा जीवन रूपांतरण बदलाव नहीं कर सकती है, ना ही चेले किसी प्रकार के धार्मिक भ्रम में थे, क्योंकि उनमें से सभी ने सख्ती से बात की और जिम्मेदारी से व्यवहार किया। प्रारंभिक कलीसिया स्वयं ठगे मूर्खतापूर्ण लोगों का समुदाय नहीं थी, बल्कि उचित, ईमानदार, और शांत विचार वाले विश्वासियों की एक देह थी। मानव जाति के इतिहास में यीशु मसीह का पुनरूत्थान सबसे महान ऐतिहासिक तथ्य है।

परमेश्वर के रूप में यीशु में विश्वास करना

जब कोई व्यक्ति प्रभु यीशु के नाम को पुकारता है और उसमें विश्वास करता है (रो- 10:9), तो मसीह जीवन दायक आत्मा के रूप में ऐसे व्यक्ति में प्रवेश करता है और उसके जीवन को बदल देता है—आज आप उस पर विश्वास करने के द्वारा उसे अनुभव कर सकते हैं। यदि आप उसके लिए अपने हृदय को खोलते हैं, तो वह आपके भीतर अपने राज्य को स्थापित करने के लिए आएगा। आप को अंधकार के राज्य से प्रकाश के राज्य में ले जाएगा (कुल. 1:13) । मसीह आपके भीतर आपका नया जीवन होगा (कुल. 3:4), और आप मसीह में एक नये व्यक्ति होगें (2 कुर. 5:17) ।

ओ महिमामय मसीह,

उद्धारक मेरे

मसीह का अनुभव- जीवन के रूप में

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  • ओह, महिमामय मसीह मेरा,
    तू है सचमुच दिव्य;
    अनंत में असीम खुदा
    समय में तू सीमित मनुष्य।

ओ मसीह, खुदा का प्रकटीकरण
अनंत, मधुर और धनी!
मानवता में मिश्रित खुदा
सब होने को रहता मुझमें।

  • तुझमें खुदा की पूर्णता
    महिमा को प्रकट करता
    शरीर में छुटकारा लाया
    आत्मा में, साथ एकता ढूढ़ता;
  • पिता का सबकुछ है तेरा
    आत्मा में जो तू है मेरा
    आत्मा सच्चाई बनाए तुझे
    कि अनुभव करूं तुझे।
  • जीवन की आत्मा, वचन से
    मुझ तक तुझको पहुंचाती है
    छूके आत्मा, वचन प्राप्त कर
    जीवन मुझमें रूप लेती है।
  • आत्मा में निहारूं तुझे,
    जैसे दर्पण प्रकट करता तेज,
    तेरे रूप में बदल जाउॅफ़,
    कि प्रकट करूं तुझे।
  • किसी भी प्रकार से हम
    तेरे विजय में सहभागी हो
    कि पवित्र और आत्मिक हो
    और छूवे महिमा का जीवन।
  • तेरा आत्मा करेगा संतृप्त
    हर अंग में खुदा फैले
    पुराने मनुष्य से छुड़ाए
    निर्माण करे सब संतो साथ।